Sunday, 3 June 2018

आखर ह माटी के शान

"आखर ह माटी के शान"

आखर ह माटी के शान,
भोजपुरी के हवे उपनाम,
कविता,कहानी,गद्द-पुराण,
आखर ह आपन मुस्कान।

सभे के बाटे अरमान,
भोजपुरी के फइलो नाव,
सब कर जुटी जब प्रयास,
तब भोजपुरी पाई मान-सम्मान।

सबके दिल में जगह बनावत,
सभे के उम्मीद जगावत,
भोजपुरी के मान बढ़ावत,
आखर आगे बढ़त जाव।

इहे बा अनुराग के चाह,
मिल बइठि जब सभे के ताल,
भोजपुरी होई हमनी के आन,
आखर ह माटी के शान।

माटी करत पुकार बा,
उम्मीद भइल बरियार बा,
इहे आखर के नाव बा,
भोजपुरी के प्यार बा।
आखर ह माटी के शान।

आखर परिवार के हमार प्रणाम।
राउर आपन अनुराग रंजन।

Monday, 16 April 2018

जे मन मे बा त प्यार करअ

जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs .....

1
तु रोज निचिता सुतेलु
हम रोज रात भर जागीले
तु छते छते छहकेलु
हम गलिये गलिये माकिले
तु गोभी जइसे फरेलु
हम किसमिस लेखा सुखिले
तु ठीक रहs बस एकरे खाती
बियफे मंगर भुखिले
हम एक टाँग प खड़ा बानी
जल्दी से बिचार करs
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs .....

2
तु जियत रह जियो जइसन
प्यार के डाटा सिंक करs
पइसा ना लागी मंगनी में
आधार से अपना लिंक करs
हम 2 G के स्पीड हई
तु 4 G के स्पीड हउ
हम लेखो फेखो कलम
तु जेल पेन के लिड हउ
अब तहरे हाथे जिनगी बा
अंजोर चाहे अन्हार करs
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs .....

3
तु गाड़ी तेज भगावेलु
हम साइकिल तेज भगाइले
तु जेतने मुंह बनावेलु
हम ओतने खूब अघाइले
तु महँगा मेकप करेलु
हम स्नो पाउडर घोसीले
तु घर में पप्पी पोसेलु
हम दुअरा कुकुर पोसीले
बीच भँवर में फंसल बानी
आर करs भा पार करs
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs ......

4
तु मॉल के सेंडिल पेन्हेंलु
हम टिउर के चपल नापिले
तु लेदर जैकीट पेंहेलु
हम ठंडा देहे कापिले
तहरे के देखे सुनेला
केहुके घर ढूक जाइले
जब गली से हमरा गुजरेलु
चउरास्ता प रुक जाइले
जे दिल से हमके चाहेलु
त दहिना हाथ खाड़ करs
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs.....

5
तु खुशी खुशी जियेलु
हम हुके डाहे मरीले
तु जेतने नफरत करेलु
लभ ओतने हम त करीले
हम लइका हइ खेलावना ना
क ख ग सिखाव जन
हमरा के कसटमर केयर
जइसे तु भरमावs जन
आदमी हई आदमी लेखा
बढ़िया से व्यवहार करs
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs.....

6

तु स्कूल कवलेज पढ़ेलु
हम तहरे के रोज पढ़िले
तु एक डेग जब चलेलु
त चार डेग हम बढ़िले
हम सीधा देखी तहरा के
तु तिरछा काहे देखेलु
हम फूल लिआई श्रद्धा से
तु लेके धाय से फेकेलु
अब इहे काम बचल बा
कि दिनभर इंतज़ार कर s
जे मन में बा त प्यार करs
भा सीधा तु इनकार करs ......

मिथलेश भइया के रचना....